Theater
उम्मीद (मनुष्य अभी जिंदा है)
एक दिन हुआ एक ऐलान, लिया गया एक फैसला खींच दी एक लकीर, और बंट गया अवाम बरसों से तारीख़ का ये पन्ना हज़ारों-लाखों घरों में ज़िंदा रहा है। तकलीफ़ का वो दौर तमाम इंसानों के दिलों में ठिकाना बनाए बैठा हुआ है। बंटवारे का दर्द झेलने वालों ने हज़ार बार ये क़िस्से और आपबीती अपने जानने वालों को सुनाये होगें। उस दर्द को बार-बार बताकर अपना दर्द कम करने की कोशिश की होगी कि कैसे उन्हें उस वक़्त अपना वतन और अपना घर-बार बँटवारे की वजह से छोड़ना पड़ा था। आज की ये कहानी उन दंगाइयों या बलवाइयों के किस्सों के नाम नहीं है जिन्होंने इस धरती के सीने में हमेशा नफरत के बीज बोए हैं। आज की कहानी सलाम करेगी, याद करेगी और बात करेगी उन मित्रताओं के बारे में जो कायम रहीं, उन प्रेमियों के बारे में जो कभी एक नहीं हुए, उन पड़ोसियों के बारे में, जिन्होंने एक-दूसरे की मदद की। इन क़िस्सों को याद रखना ज़रूरी है क्यूंकि बँटवारे का इतिहास, सिर्फ़ हिंसक वारदातों की तारीख़ नहीं है। इसमें हमदर्दी है, उम्मीद है, इंसानियत के तमाम क़िरदारों के क़िस्से हैं। बहुत से लोगों ने पागलपन के उस दौर में भी इंसानियत और दोस्ती को ज़िंदा बचाए रखा था। जो उस दर्द में भी नई उम्मीद का एक अंकुर बो गया ।
Teelu Rauteli (A great female warrier of uttarakhand)
Heer Ranjha









































